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۱۳۹۴/۰۴/۰۱
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اوقات شرعی به افق روستای وادقان در ماه رمضان1394
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نیمه شب |
اذان مغرب |
اذان ظهر |
اذان صبح |
روز |
تاریخ |
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00:13 |
20:41 |
13:05 |
4:06 |
پنجشنبه |
28/3 |
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00:13 |
20:42 |
13:06 |
4:06 |
آدینه |
29/3 |
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00:13 |
20:42 |
13:06 |
4:06 |
شنبه |
30/3 |
|
00:13 |
20:42 |
13:06 |
4:06 |
یکشنبه |
31/3 |
|
00:14 |
20:42 |
13:06 |
4:06 |
دوشنبه |
1/4 |
|
00:14 |
20:43 |
13:07 |
4:07 |
سه شنبه |
2/4 |
|
00:14 |
20:43 |
13:07 |
4:07 |
چهارشنبه |
3/4 |
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00:15 |
20:43 |
13:07 |
4:07 |
پنجشنبه |
4/4 |
|
00:15 |
20:43 |
13:07 |
4:08 |
آدینه |
5/4 |
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00:15 |
20:43 |
13:07 |
4:08 |
شنبه |
6/4 |
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00:15 |
20:43 |
13:08 |
4:09 |
یکشنبه |
7/4 |
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00:16 |
20:43 |
13:08 |
4:09 |
دوشنبه |
8/4 |
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00:16 |
20:43 |
13:09 |
4:10 |
سه شنبه |
9/4 |
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00:16 |
20:43 |
13:09 |
4:10 |
چهارشنبه |
10/4 |
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00:16 |
20:43 |
13:09 |
4:11 |
پنجشنبه |
11/4 |
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00:16 |
20:43 |
13:09 |
4:12 |
آدینه |
12/4 |
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00:17 |
20:43 |
13:09 |
4:12 |
شنبه |
13/4 |
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00:17 |
20:43 |
13:10 |
4:13 |
یکشنبه |
14/4 |
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00:17 |
20:42 |
13:10 |
4:13 |
دوشنبه |
15/4 |
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00:18 |
20:42 |
13:10 |
4:14 |
سه شنبه |
16/4 |
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00:18 |
20:42 |
13:10 |
4:15 |
چهارشنبه |
17/4 |
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00:18 |
20:42 |
13:10 |
4:16 |
پنجشنبه |
18/4 |
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00:18 |
20:41 |
13:10 |
4:16 |
آدینه |
19/4 |
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00:19 |
20:41 |
13:11 |
4:17 |
شنبه |
20/4 |
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00:19 |
20:41 |
13:11 |
4:18 |
یکشنبه |
21/4 |
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00:19 |
20:40 |
13:11 |
4:19 |
دوشنبه |
22/4 |
|
00:19 |
20:40 |
13:11 |
4:20 |
سه شنبه |
23/4 |
|
00:20 |
20:39 |
13:11 |
4:21 |
چهارشنبه |
24/4 |
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00:20 |
20:39 |
13:11 |
4:22 |
پنجشنبه |
25/4 |
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00:20 |
20:39 |
13:11 |
4:23 |
آدینه |
26/4 |
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00:21 |
20:38 |
13:11 |
4:23 |
شنبه |
27/4 |
ملاک محاسبه دانشگاه تهران - کاری از کانون فرهنگی مهدیه روستای وادقان www.mahdiehvadeghan.ir





هرگاه سخن از عدالت به میان می آید ذهن ها متوجه امور کلان اجتماعی و سیاسی و فرهنگی می شود و از امور جزئی غافل می شود. دامنه و گستره عدالت به حدی وسیع است که کوچکترین و دور از ذهن ترین مسائل را نیز دربرخواهد گرفت.
مرحوم کربلایی محمدعلی حسن زاده بعد از عمری کوشش و تلاش به دیار باقی شتافت و تها خاطره چاوش خوانی او که با یک دست پرچم سبز رنگی بدوش داشت و دست دیگرش را به گوشش می گرفت و با صدای قراء چاوشی می کرد در اذهان باقی مانده است. آن مرحوم علاوه بر کاسبی در هر محفل و مجلس که قدیمی تر در حسینیه و بعداً در مجلس برپا می گردید، به قرائت قرآن می پرداخت و در روزهای برداشتن نخل در حالی که سوار بر اسبی بود، به نوحه خوانی و مرثیه سرایی می پرداخت. علاوه بر این هر زائری که به زیارت خانه خدا و یا عتبات عالیات می رفت هم قبل از رفتن و هم بعد از آمدن از مکه، کربلا، سوریه و یا مشهد چاوشی می خواند. در اواخر عمر که از ناحیه پا رنج می برد و با عصا راه میرفت، تنها قادر بود پرچم سبز رنگ را به دوش بکشد و دیگر نمی توانست دست دیگرش را به گوشش بگیرد. خدا یش بیامرزد./
